अमित शाह ने माना – ‘देश के गद्दारों… जैसे नारे बने दिल्ली में हार का सबब’

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा की हार के लिए बीजेपी नेताओं के विवादित नारों और भड़काऊ भाषणों को माना है। उन्होने कहा कि ‘गो’ली मारो’ और ‘भारत-पाकिस्तान’ जैसे बयान नहीं होने चाहिए थे।

गुरुवार को एक समाचार चैनल के कार्यक्रम में उन्होने कहा, ‘गो’ली मारो’ और ‘भारत- पाक मैच’ जैसे बयान नहीं दिए जाने चाहिए थे। हमारी पार्टी ने इस तरह के बयानों से खुद को अलग कर लिया है। फिर भी संभव है कि इस तरह की टिप्पणियों से पार्टी की हार हुई है। इसी के चलते हमारी पार्टी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकी।

शाहीन बाग के सवाल पर केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि सभी को शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि जिसे भी नागरिकता कानून से जुड़े मुद्दो को लेकर चर्चा करनी हो वो उनके दफ्तर से समय ले सकता है। तीन दिनों के भीतर समय दे दिया जाएगा।

सीएए का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि हमने धर्म के आधार पर कभी किसी से भेदभाव नहीं किया है। सीएए में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि मुसलमानों की नागरिकता छीन ली जाएगी। उन्होंने कहा कि सीएए की सिर्फ आलोचना न करें, बल्कि इस पर मेरिट के आधार पर चर्चा करें। सीएए ना तो मुसलमान विरोधी है और ना ही यह गैर-अल्पसंख्यकों के खिलाफ है।

उन्होंने कहा- एनआरसी को पूरे देश में लागू करने को लेकर अभी तक सरकार ने कोई फैसला नहीं लिया है। नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (एनपीआर) की प्रक्रिया के दौरान अगर कोई अपना दस्तावेज नहीं दिखाना चाहता है, तो वह इसके लिए स्वतंत्र है। एनआरसी का जिक्र भाजपा के घोषणा पत्र में नहीं किया गया था।

उन्होंने कहा- जम्मू-कश्मीर में कोई भी जाने के लिए स्वतंत्र है, इनमें राजनेता भी शामिल हैं। किसी के वहां आने-जाने पर कोई रोक नहीं है। तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों फारुक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती को हिरासत में रखे जाने पर शाह ने कहा- इन लोगों पर पब्लिक सेफ्टी एक्ट के तहत केस दर्ज करना स्थानीय प्रशासन स्तर पर लिया गया फैसला था। उमर अब्दुल्ला इस मामले को सुप्रीम कोर्ट ले गए हैं और अब वही इस पर फैसला लेगा।


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