बिहार में NRC के खिलाफ़ प्रस्ताव पास, एनपीआर को भी दी मंजूरी

बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को NRC पर प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया। ताकि बिहार में राष्ट्रीय रजिस्टर कानून पास न किया जा सके। इसके साथ ही राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) को भी मंजूरी दे दी गई।

दरअसल, तेजस्वी यादव ने विधानसभा में उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी द्वारा जारी किए गए अधिसूचना के मुद्दे को उठाया। तेजस्वी ने कहा कि अधिसूचना के अनुसार 15 मई से बिहार में एनपीआर पर काम शुरू हो जाएगा। ऐसे में सरकार बताए कि बिहार में एनपीआर 2010 के फॉर्मेट के अनुसार होगा या 2020 के फॉर्मेट के अनुसार।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तेजस्वी के सवाल पर कहा कि एनपीआर (नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर) को लेकर अभी औपचारिक अधिसूचना नहीं जारी की गई है। बिहार सरकार ने केंद्र सरकार को पत्र लिखा है। इसमें कहा गया है कि एनपीआर 2010 के फॉर्मेट पर हो। उसमें सिर्फ ट्रांसजेंडर का नया कॉलम जोड़ा जाए। एनपीआर पर किसी को कन्फ्यूजन में रहने की जरूरत नहीं है।

नीतीश कुमार ने कहा, हमने मांग की है कि राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर 2020 और 2010 के बीच प्रश्नों के प्रारूप में अंतर को निरस्त करते हुए किया जाए। केवल ट्रांसजेंडर के सूचना का समावेश किया जाए जो 2010 में नहीं था। उन्होंने कहा, जो राज्य सरकार की तरफ से पत्र भेजा गया है, उसी प्रस्ताव को विधानसभा से पास कर दिया जाए। एनआरसी पर कोई चर्चा नहीं की गई है, एनआरसी लाने की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि एनआरसी का अमेंडमेंट 2003 में हो चुका है।

एनआरसी पर नीतीश ने कहा कि एनआरसी की कोई जरूरत नहीं है। इस पर अभी कोई बात नहीं हुई है। खुद देश के प्रधानमंत्री ने कहा है कि एनआरसी पर कोई चर्चा नहीं हुई है। जब इस पर कोई फैसला हुआ ही नहीं है तो चिंता क्यों करते हैं। एनआरसी का कोई तुक नहीं है। जहां तक सीएए का मुद्दा है तो यह मामला सुप्रीम कोर्ट के पास है। सबको सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करना चाहिए।


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