राहुल गांधी ने की महबूबा मुफ्ती की रिहाई की मांग, बोले – गैरकानूनी रूप से नेताओं को बंदी बनाया

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने पब्लिक सेफ्टी एक्ट (पीएसए) के तहत गिरफ्तार जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती की रिहाई की मांग की। उन्होंने कहा कि महबूबा मुफ्ती की नजरबंदी एक नागरिक के संवैधानिक अधिकारों का हनन है।

राहुल ने ट्वीट कर कहा, ‘भारत का लोकतंत्र उसी समय क्षतिग्रस्त हो गया जब भारत सरकार ने गैरकानूनी रूप से राजनीतिक नेताओं को बंदी बनाया। समय आ गया है कि महबूबा मुफ्ती को रिहा किया जाए। राहुल ने केंद्र की मोदी सरकार पर प्रशानिक तंत्र का दुरुपयोग करने का आरोप भी लगाया।

वहीं प्रियंका गांधी ने कहा है कि हिंदुस्तान के संविधान और लोकतंत्र में आस्था रखने वाले नेताओं के साथ केंद्र सरकार द्वारा किया जा रहा रवैया तानाशाही का प्रतीक है। उन्होंने ट्विटर पर लिखा है कि महबूबा मुफ्ती को नजरबंद रखना अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक है उन्हें रखना चाहिए।

इससे पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने शनिवार को महबूबा मुफ्ती की नजरबंदी बढ़ाने का विरोध किया था। उन्होंने शनिवार को कहा कि सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत मुफ्ती की नजरबंदी बढ़ाना कानून का ही उल्लंघन नहीं है बल्कि नागरिकों को मिले संवैधानिक अधिकारों पर भी हमला है। उन्होंने पूछा कि 61 साल की पूर्व मुख्यमंत्री सार्वजनिक सुरक्षा के लिए कैसे खतरा हो सकती हैं?

कांग्रेस नेता ने ट्वीट कर कहा था, ‘पीएसए के तहत सुश्री महबूबा मुफ्ती की नजरबंदी का विस्तार कानून का दुरुपयोग है और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों पर हमला है। 61 वर्षीय पूर्व मुख्यमंत्री, चौबीसो घंटे सुरक्षा गार्ड से संरक्षित व्यक्ति, सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा कैसे है?’

चिदंबरम ने आगे कहा था, ‘उन्होंने उन शर्तों को जारी करने के प्रस्ताव को सही ढंग से खारिज कर दिया, जो कोई भी स्वाभिमानी राजनीतिक नेता मना कर देता। उनकी नजरबंदी के लिए दिए गए कारणों में से एक- उनकी पार्टी के झंडे का रंग है- जो हंसी का पात्र था। उन्हें अनुच्छेद 370 के निरस्तीकरण के खिलाफ क्यों नहीं बोलना चाहिए? क्या यह स्वतंत्र भाषण के अधिकार का हिस्सा नहीं है?’

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा था, ‘मैं अनुच्छेद 370 को निरस्त करने को चुनौती देने वाले उच्चतम न्यायालय में एक मामले में पेश वकील में से एक हूं। अगर मैं अनुच्छेद 370 के खिलाफ बोलूं- जैसा कि मुझे करना चाहिए- क्या यह सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा है? हमें सामूहिक रूप से अपनी आवाज बुलंद करनी चाहिए और महबूबा मुफ्ती को रिहा करें की मांग करनी चाहिए।’

बता दें कि पूर्व मुख्यमंत्री की हिरासत के मौजूदा आदेश की अवधि इस साल पांच अगस्त को खत्म हो रही थी। लेकिन शुक्रवार को गृह विभाग की ओर से जारी आदेश के मुताबिक महबूबा मुफ्ती की नजरबंदी को तीन महीने तक के लिए और बढ़ा दिया गया। मुफ्ती अपने आधिकारिक आवास फेयरव्यू बंगले में अगले तीन महीने और हिरासत में ही रहेंगी। इस बंगले को उप जेल घोषित किया गया है ।


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