देश की गिरती अर्थव्यवस्था चिंताजनक: मौलाना उमर कासमी

भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश सचिव मौलाना उमर ने देश की गिरती हुई अर्थव्यवस्था पर चिंता जताई है। उन्होने कहा कि आज देश की अर्थव्यवस्था डगमगा रही है जीडीपी की वृद्धि दर दर्शाती है देश को लंबे समय तक इसका खामियाजा भुगतना होगा। कासमी ने कहा, देश के गिरते आयात-निर्यात, बढ़ती महंगाई, लोगों की जाती नौकरियाँ, रुपए का गिरना, डॉलर का बढ़ना आर्थिक मंदी के पुख्ता सबूत है। उन्होने कहा, मोदी के दूसरे कार्यकाल में लोगों के रोजगार पर सीधा प्रभाव पड़ा है। देश में बेरोजगारी दर 8.5 प्रतिशत जा पहुंची है। जो चार दशक के सबसे उच्च स्तर पर है।जिस पर सरकार के आकडे भी मुहर लगाते दिख रहे।

कांग्रेस नेता ने बताया कि नेशनल स्टैटिक्स ऑफिस सर्वे (एनएसओ) के साल 2018-19 की तिमाही के आंकड़ों के मुताबिक देश का हर पांचवा युवा बेरोजगार है।  उन्होने कहा, अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर सस्टेनेबल इंप्लायमेंट के द्वारा जारी एक शोध पत्र में भी दावा किया गया कि 2011-12 से लेकर के 2017-18 के बीच 90 लाख लोग अपनी नौकरी गंवा चुके। वहीं सीएमआईई के आंकड़ों के मुताबिक त्रिपुरा, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में लोगों को नौकरियां ढूंढने पर भी नहीं मिल रही हैं। त्रिपुरा में बेरोजगारी दर 23.3 फीसदी रिकॉर्ड की गई है। इस साल फरवरी में यह आंकड़ा केवल 40 करोड़ रह गया। इस हिसाब से 2018 और 2019 के बीच करीब 60 लाख लोग बेरोजगार हो गए।

उन्होने कहा कि गिरती जीडीपी और बढ़ती महंगाई आर्थिक मंदी का साफ इशारा कर रही है। दरअसल, खुदरा महंगाई दर तीन साल के सर्वोच्च स्तर है। खुदरा महंगाई  नवंबर में बढ़कर 5.54 फीसदी पर पहुंच गई। एक साल पहले यह 2.33 फीसदी थी। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा गुरुवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक नवंबर में खाद्य वस्तुओं की महंगाई बढ़कर 10.01 फीसदी पर पहुंच गई।

उन्होने आगे कहा, आर्थिक मंदी का असर विदेशी व्यापार पर भी हुआ है। बीते महीने देश के आयात-निर्यात में गिरावट देखने को मिली। इस साल नवंबर में भारत का निर्यात पिछले साल की तुलना में 26.07 अरब डॉलर से घटकर 25.98 अरब डॉलर रह गया। अगर आयात की बात करें तो पिछले साल के मुकाबले इस बार नवंबर में यह 12.71 फीसदी घटकर 38.11 अरब डॉलर रह गया है। पिछले साल नवंबर में आयात 43.66 अरब डॉलर था।

कासमी का कहना है कि आरबीआई ने भी जीडीपी की गिरावट का अनुमान भी जताया है। केंद्रीय बैंक के अनुसार, साल 2019-20 के दौरान जीडीपी में और गिरावट आएगी और यह 6.1 फीसदी से गिरकर पांच फीसदी पर आ सकती है। उन्होने कहा, जुलाई-सितंबर, 2019 की तिमाही के दौरान भारत की आर्थिक विकास दर घटकर महज 4.5 फीसदी रह गई, जो लगभग साढ़े छह साल का निचला स्तर है।

उन्होने ये भी बताया कि हाल ही में विश्व बैंक ने देश की लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था और इकोनॉमिक स्लोडाउन के बीच जीडीपी ग्रोथ रेट के अनुमान में कटौती कर मोदी सरकार के 5 ट्रिलियन इकॉनमी के दावों की पोल खोल कर रख दी है। विश्व बैंक ने संभावना जताई है कि 2019-20 के वित्त वर्ष में भारत की विकास दर पांच फीसदी रहेगी। विश्व बैंक ने कहा कि भारत की तुलना में पड़ोसी देश बांग्लादेश आगे रहेगा।

उन्होने सरकार से निवेदन किया कि अर्थव्यवस्था के सुधार के लिए तत्काल कदम उठाए जाये। इसके लिए पूर्व पीएम और महान अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह की मदद ली जाए। जिनके आर्थिक सुधारों का लोहा दुनिया भी मानती है। उन्होने कहा, हाल ही में मनमोहन सिंह ने अर्थव्यवस्था को उच्च विकास के रास्ते पर ले जाने के लिए पांच उपाय सुझाए। सरकार को इन सुझावों पर अमल करना चाहिए।


    देश के अच्छे तथा सभ्य परिवारों में रिश्ता देखें - Register FREE

[vivafbcomment]