JNU में बोले चिदंबरम – मुस्लिमों को डिटेंशन कैंप भेजा गया तो जनांदोलन होना चाहिए

नई दिल्ली। कांग्रेस नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने गुरुवार को दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी पहुंचे। इस दौरान उन्होंने सीएए, एनआरसी और एनपीआर पर खुलकर बात की।

चिदंबरम ने कहा कि “एनपीआर एनआरसी और सीएए तीनों अलग हैं लेकिन तीनो इंटरकनेक्टेड है, संविधान में नागरिकता का प्रावधान है और पूरे विश्व में हर जगह देश के अंदर रहने वाले नागरिकों को नागरिकता का प्रावधान होता है अगर किसी पिता, ग्रैंड पेरेंट्स इंडिया में रह चुके हैं उनके बच्चे यहीं के नागरिक होते हैं।”

उन्होंने कहा भारत धर्म के आधार पर नागरिकता नहीं देता। चिदंबरम ने कहा धार्मिक आधार पर ही प्रताड़ना का जिक्र क्यों है। इजराइल जैसे कई देशों में धर्म के आधार पर नागरिकता दी जा रही है, लेकिन भारत में यह संभव नहीं। हमारा संविधान इसकी इजाजत नहीं देता। हम धर्म आधारित उत्पीड़न का समर्थन नहीं कर सकते। हमें शरणार्थियों के लिए कानून बनाने की जरूरत नहीं है।

चिदंबरम ने यह भी सवाल उठाया, ‘‘सीएए में 3 देशों (बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान) के अल्पसंख्यकों का ही जिक्र क्यों हैं? इसमें नेपाल, भूटान और चीन को शामिल क्यों नहीं किया गया? पाकिस्तान के अहमदिया और शिया, म्यांमार के रोहिंग्या और तमिल हिंदुओं पर भी जुल्म ढाए जा रहे हैं, तो फिर इन्हें बाहर क्यों रखा गया है?’’ एनआरसी पर सवाल उठाते हुए पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि दुनिया में शायद ही कोई कौन सा देश दस्तावेज से बाहर रहने वालों को स्वीकार करेगा?

चिदंबरम ने कहा कि असम में 19 लाख लोगों को एनआरसी से बाहर रखे जाने के बाद सरकार सीएए लेकर आई ताकि इनमें से 12 लाख हिंदुओं को नागरिकता दी जाए। एक छात्र ने सवाल किया कि अगर सीएए को सुप्रीम कोर्ट वैध ठहराता है तो फिर आगे क्या कदम हो सकता है तो चिदंबरम ने कहा, ‘(ऐसी स्थिति में) सूची से बाहर रहने वालों में मुस्लिम होंगे और उनकी पहचान करने, बाहर निकालने या राष्ट्रविहीन घोषित करने का प्रयास होगा। ऐसे में अगर किसी मुसलमान को बाहर निकाला जाता है अथवा उन्हें हिरासत शिविर में रखा जाता है तो विशाल जनांदोलन होना चाहिए।’

उन्होंने कहा कि कांग्रेस का मानना है कि सीएए को निरस्त किया जाना चाहिए और राजनीतिक संघर्ष होना चाहिए ताकि राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) को 2024 के आगे ढकेला जा सके। राज्य की भागीदारी के बिना एनपीआर नहीं किया जा सकता है।


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