विवादित ट्वीट मामले में जफरुल इस्लाम को हाई कोर्ट से मिली अग्रिम जमानत

दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष ज़फरुल इस्लाम के खिलाफ कुवैत को लेकर किए गए ट्वीट के मामले में देशद्रोह (Sedition) और धर्म के आधार पर दुश्मनी को बढ़ावा देने का मामला दर्ज किया गया था। दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में अग्रिम जमानत दे दी है।

जस्टिस मनोज ओहरी की बेंच ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये हुई सुनवाई के बाद अग्रिम जमानत देने का आदेश दिया। हाई कोर्ट ने 12 मई को जफरुल इस्लाम की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी थी। दिल्ली पुलिस ने 12 जून को कोर्ट से इजाजत मिलने के बाद जफरुल इस्लाम से पूछताछ की थी।

दिल्ली हाईकोर्ट के जज मनोज कुमार ओहरी ने जफरुल को 50 हजार रुपए के निजी मुचलके और इतनी ही श्योरिटी पर सशर्त जमानत दी, कोर्ट ने जफरुल को हिदायत दी है कि उन्हें जांच में सहयोग करना होगा और एजेंसी द्वारा बुलाए जाने पर जांच में हिस्सा लेना होगा।

हाई कोर्ट में जफरुल इस्लाम से संबंधित एक मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार ने 4 जून को हाई कोर्ट को बताया था कि जफरुल इस्लाम ने अपना जवाब दे दिया है। बता दें कि वसंत कुंज के एक निवासी की शिकायत पर खान के खिलाफ 30 अप्रैल को भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए और 153ए के तहत मामला दर्ज किया गया था।

जफरुल इस्लाम ने ट्विटर पर लिखा था कि  ”अगर भारत के मुसलमानों ने अरब और दुनिया के मुसलमानों से कट्टर/असहिष्णु लोगों के हेट कैंपेन, लिंचिंग और दंगों की शिकायत कर दी तो ज़लज़ला आ जाएगा।” जफरुल इस्लाम खान ने ज़ाकिर नाइक का भी समर्थन किया था। जफरुल इस्लाम का दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष पद का कार्यकाल 14 जुलाई को समाप्त हो चुका है।


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