लॉकडाउन में गरीबों को मध्य प्रदेश में बांटा खराब चावल, जानवरों के खाने लायक भी नहीं

लॉकडाउन के दौरान मध्य प्रदेश में पीडीएस के जरिये खराब चावल बांटा गया। जो जानवरों के खाने लायक भी नहीं है। दरअसल केंद्रीय खाद्य मंत्रालय की टीम की और से चावल के नमूनों की जांच में इस बार का खुलासा हुआ है।

सीजीएल लैब में जांच के दौरान सामने आया कि जो चावल गरीबों को राशन दुकानों के माध्यम से दिया जा रहा था वह खाने के लायक नहीं था। इसका साफ मतलब यह है कि चावल जानवरों के खाने लायक भी नहीं था। बताया जा रहा है कि ये चावल 2 से 3 साल पुराना था।

इसी बीच अब एफसीआई जबलपुर के अधिकारियों ने कटनी जिले के 4 से ज्यादा गोदामों से चावल के नमूने लिए हैं। अब सरकार ने यह निर्णय लिया है कि पूरे मध्य प्रदेश में जहां-जहां गोदामों में चावल रखा हुआ है, उसकी जांच की जाएगी। इस मामले में अब राजनीति भी शुरू हो गई है।

कांग्रेस प्रवक्ता भूपेंद्र गुप्ता ने कहा है कि केंद्र सरकार की रिपोर्ट में साफ तौर पर इस बात का उल्लेख है कि मंडला और बालाघाट जिले में पोल्ट्री ग्रेड का चावल दो से तीन साल पुराना था। जब प्रदेश में बीजेपी की सरकार थी और ऐसे में बीजेपी सरकार की जिम्मेदारी बनती है और ऐसे में अपनी जिम्मेदारी से बचते हुए कांग्रेस के 15 महीने की सरकार पर आरोप लगाना ठीक नहीं है।

वहीं बीजेपी प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने कहा है कि यदि चावल खरीदी 2 से 3 साल पुरानी थी तो 15 महीने तक कांग्रेस की सरकार इस मामले में चुप क्यों रही। क्यों किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई। बीजेपी प्रवक्ता के मुताबिक, चावल खरीदी का पूरा गड़बड़झाला पूर्व की कांग्रेस सरकार में हुआ है। 15 महीने तक सत्ता में रहने के बाद भी गड़बड़ी को रोकने में कांग्रेस सरकार विफल रही। अपनी गलतियों का ठीकरा बीजेपी पर फोरना ठीक नहीं है।


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