ख्वाजा साहब से जुड़े अपमान के मामले में SC ने अमीश देवगन के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई पर रोक बढ़ाई

सूफी संत मोइनुद्दीन चिश्ती के खिलाफ की गई अपमानजनक टिप्पणी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को टीवी समाचार एंकर अमीश देवगन के खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई को लेकर संरक्षण की अवधि को बढ़ा दिया है।

न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की खंडपीठ ने अमीश देवगन के वकील सिद्धार्थ लूथरा की दलीलें सुनने के बाद याचिकाकर्ता के खिलाफ जांच एवं दंडात्मक कार्रवाई पर रोक अगले आदेश तक लिए बढ़ा दी। श्री लूथरा ने दलील दी कि जांच की स्थिति रिपोर्ट दाखिल कर दी गयी है।

खंडपीठ ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वे उन शिकायतकर्ताओं को भी याचिका की प्रतियां दे दें, जिन्हें आज तक नहीं उपलब्ध करायी जा सकी है। न्यायालय ने इसके बाद केंद्र सरकार और अन्य प्रतिवादियों को दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। याचिकाकर्ता प्रतिवादियों के जवाब पर रिज्वॉइंडर (जवाबी हलफनामा) दायर करेंगे।

इससे पहले 26 जून को सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती पर अपनी टिप्पणी के बाद न्यूज 18 एंकर अमीश देवगन के खिलाफ दर्ज कई एफआईआर पर जांच और इन एफआईआर पर कठोर कार्रवाई करने पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की अगली तारीख तक रोक लगा दी थी।

देवगन के खिलाफ इस समय राजस्थान, महाराष्ट्र और तेलंगाना में पांच प्राथमिकी दर्ज हैं। ये प्राथमिकियां 15 जून को देवगन के समाचार कार्यक्रम ‘आर पार’ में सूफी संत के लिए कथित तौर पर अपमानजनक शब्द के इस्तेमाल के मामले में दर्ज कराई गई थीं।


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