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आरबीआई ने बैंकों को नही दिया पूरा कैश, नोटबंदी से पहले ही छप चुके थे 4.94 लाख करोड़ के नए नोट

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नई दिल्ली | नोट बंदी के बाद से पूरा देश कैश की किल्लत से झूझ रहा है. बैंकों में कैश नही है और एटीएम बंद पड़े है. ऐसे में सवाल उठता है की क्या आरबीआई ने बिना किसी तैयारी के नोट बंदी का फैसला लागु कर दिया. क्या आरबीआई ने नोट बंदी के बाद ही नए नोटों की छपाई शुरू की? नोट बंदी के बाद देश में जो परिस्थिति पैदा हुई उसे देखकर तो ऐसा ही लगता है की आरबीआई के पास न कोई तैयारी थी और न ही नए नोट.

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लेकिन आरबीआई के आंकड़े कुछ और ही कहते है. एक आरटीआई के जवाब में आरबीआई ने बताया की नोट बंदी से पहले करीब 4.94 करोड़ रूपए के 2000 के नोट छप चुके थे. अगर आरबीआई के पास इतने नए नोट उपलब्ध थे तो उन्होंने देश को आर्थिक इमरजेंसी की और क्यों धकेल दिया. आखिर किन वजहों से बैंकों को ये नोट उपलब्ध नही कराये गए.

एक अन्य आरटीआई में आरबीआई ने बताया की 19 दिसम्बर तक बैंकों के पास 2000 और 500 के 220 करोड़ नोट पहुंचा दिए गए. जिमसे में से 90 फीसदी 2000 के और बाकी 500 रूपए के नोट थे. अगर इनकी कीमत निकाली जाये तो बैंकों के पास 4.07 करोड़ रूपए के 2000 के नोट पहुंचाए गए. इसका मतलब यह है की अभी तक भी बैंकों के पास वो भी नए नोट नहीं पहुंचे जो नोट बंदी से पहले छ्प चुके थे.

आरबीआई के अनुसार नोट बंदी के बाद चारो प्रिंटिंग प्रेस ने तीन शिफ्ट में नोटों की छपाई की. अगर यह भी मान ले की नोट बंदी के बाद इन प्रिंटिंग प्रेस ने करीब 2 लाख करोड़ रूपए भी छापे होंगे तो भी आरबीआई के पास 3 लाख करोड़ रूपए सरप्लस में होने चाहिए. अगर इन आंकड़ो पर यकीन करे तो नोट बंदी के बाद आरबीआई के पास पर्याप्त मात्रा में नोट उपलब्ध थे.

आरबीआई के पास कैश उपलब्ध होने के बावजूद उन्होंने बैंकों तक इस कैश को क्यों नही पहुँचाया? आखिर देश को एक ऐसे अँधेरे की और क्यों धकेला गया जिसकी वजह से देश को कई गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते है. देश की अर्थव्यवस्था को पहले ही ब्रेक लग चुके है, लोगो का रोजगार छीन रहा है, उधोग धंधे ठप पड़ चुके है ,घरो में शादिया टूट रही है, किसान मजदूर सब परेशान है. कैश को रोक कर रखने के पीछे के क्या कारण है , इनका खुलासा होना चाहिए.

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