Home राष्ट्रिय जजों का इस तरह सड़कों पर आना, मुल्क के लिए एक चेतावनी...

जजों का इस तरह सड़कों पर आना, मुल्क के लिए एक चेतावनी – रविश कुमार

16
SHARE

नई दिल्ली । देश की सर्वोच अदालत के चार जजों ने आज मीडिया के सामने आकर तहलका मचा दिया।  इन जजों ने जस्टिस लोया की मौत के मामले में चीफ़ जस्टिस की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए। इन्होंने कहा कि हमने दो महीने पहले चीफ़ जस्टिस को एक पत्र लिखा एवं उनसे मुलाक़ात की। लेकिन हम उन्हें समझने में असफल रहे। हमने अपनी अंतरात्मा की आवाज़ सुनी और जनता के सामने अपनी बात रखने का फ़ैसला किया।

इस तरह सर्वोच अदालत के चार जजों के मीडिया के सामने आने के बाद एनडीटीवी के पत्रकार रविश कुमार ने इसे मुल्क के लिए एक चेतावनी क़रार दिया। उन्होंने कहा कि जज लोया की मौत ने आज सप्रीम कोर्ट को एक एतिहासिक मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है। जजों का इस तरह सड़क पर आना मुल्क के लिए एक चेतावनी है। इस मामले में रविश कुमार ने अपने फ़ेसबुक पेज पर एक पोस्ट लिखी है।

सप्रीम कोर्ट में लगी है अंतरात्मा की अदालत शीर्षक से लिखी इस पोस्ट में उन्होंने लिखा,’ डिकल कालेज और जज लोया की सुनवाई के मामले में गठित बेंच ने जजों को अपना फ़र्ज़ निभाने के लिए प्रेरित किया है या कोई और वजह है, यह उन चार जजों के जवाब पर निर्भर करेगा। कोर्ट कवर करने वाले संवाददाता बता रहे हैं कि बेंच के गठन और रोस्टर बनाने के मामले ने इन चार जजों के मन में आशंका पैदा की और उन्होंने आप मुल्क से सत्य बोल देना का साहस किया है। ‘

रविश आगे लिखते है,’ जज लोया की मौत मुल्क की अंतरात्मा को झकझोरती रहेगी। आज विवेकानंद की जयंती है। अपनी अंतरात्मा को झकझोरने का इससे अच्छा दिन नहीं हो सकता। विवेकानंद सत्य को निर्भीकता से कहने के हिमायती थे। सवाल उठेंगे कि क्या सरकार ज़रूरत से ज़्यादा हस्तक्षेप कर रही है? क्या आम जनता जजों को सरकार के कब्जे में देखना बर्दाश्त कर पाएगी ? फिर उसे इंसाफ़ कहाँ से मिलेगा।’

जस्टिस लोया पर रविश कुमार ने लिखा,’ जज लोया सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले में सुनवाई कर रहे थे। इस मामले में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह आरोपी थे। जज की मौत होती है। उसके बाद अमित शाह बरी हो जाते हैं। कोई सबूत नहीं है दोनों में संबंध कायम करने के लिए मगर एक जज की मौत हो, उस पर सवाल न हो, पत्नी और बेटे को इतना डरा दिया जाए कि वो आज तक अपने प्यारे वतन भारत में सबके सामने आकर बोलने का साहस नहीं जुटा सके। क्या यही विवेकानंद का भारत है ?’

पढ़े पूरी पोस्ट