पतंजलि कोरोना के इलाज के दावे से पीछे हटी, आयुष विभाग को दिया के नोटिस का जवाब

कोरोना के इलाज से जुड़े कोरोनिल दवा पर पतंजलि आयुर्वेद ने यू-टर्न ले लिया है। आयुष विभाग की ओर से दिए गए नोटिस के जवाब में पतंजलि ने कहा है कि उसने कभी भी कोरोना की दवा बनाने का दावा नहीं किया बल्कि जो दवा बनाई गई है, उससे कोरोना के मरीज ठीक किए हैं।

पतंजलि आयुर्वेद के अध्यक्ष आचार्य बालकृष्ण का कहना है, ‘पतंजलि आयुर्वेद अब भी अपने दावे और दवा पर कायम है। हमने कभी भी कोरोना की दवा बनाने का दावा नहीं किया है। सरकार की गाइडलाइन के अनुसार अनुमति लेकर जो दवाई बनाई गई है, उससे कोरोना के मरीज भी ठीक हुए हैं। आयुष विभाग की ओर से जारी नोटिस का जवाब दे दिया गया है।’

बता दें कि पतंजलि की दिव्य फार्मेसी ने मंगलवार 23 मार्च को कोरोना की दवा ईजाद करने का दावा किया था। पतंजलि ग्रुप ने  ‘कोरोनिल टैबलेट’ और ‘श्वासारि वटी’ नाम की दो दवायें लॉन्च कीं जिनके बारे में कंपनी ने दावा किया है कि ‘ये कोरोना वायरस से होने वाली बीमारी का आयुर्वेदिक इलाज हैं।’

इनके बारे में खुद रामदेव ने दावा किया था कि “कोविड-19 की दवाओं की इस किट को दो स्तर के ट्रायल के बाद तैयार किया गया है। पहले क्लीनिकल कंट्रोल स्टडी की गई थी और फिर क्लीनिकल कंट्रोल ट्रायल भी किया जा चुका है।” रामदेव ने कहा, ‘‘यह दवाई शत प्रतिशत (कोविड-19) मरीजों को फायदा पहुंचा रही है। 100 मरीजों पर नियंत्रित क्लिनिकल ट्रायल किया गया, जिसमें तीन दिन के अंदर 69 प्रतिशत और चार दिन के अंदर शत प्रतिशत मरीज ठीक हो गये और उनकी जांच रिपोर्ट नेगेटिव आई।’’

मामला सुर्खियों में आया तो केंद्रीय आयुष मंत्रालय ने इसका संज्ञान लिया। मंत्रालय ने दिव्य फार्मेसी को नोटिस भेजकर तत्काल दवा के प्रचार-प्रसार पर रोक लगा दी। 24 जून को उत्तराखंड आयुष विभाग ने भी दिव्य फार्मेसी को नोटिस भेजकर दवा के प्रचार प्रसार पर रोक लगा दी। साथ ही सात दिनों के भीतर नोटिस का जवाब देने को कहा था।


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