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एक ही अध्यादेश को पांचवी बार हस्ताक्षर के लिए भेजने पर राष्ट्रपति हुए नाराज

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नई दिल्ली | सरकार जब किसी कानून या किसी एक्ट में संसोधन को संसद में पास नही करा पाती तो उसको अधिकार प्राप्त है की वो एक अध्यादेश लाकर इसको लागू कर सकती है लेकिन यह केवल छह महीने के लिए लागु हो सकता है. इसको आगे लागु करने के लिए या तो सरकार को दोबारा अध्यादेश लाना होगा या फिर उसको संसद में पास कराना होगा. अध्यादेश को पहले सरकार की कैबिनेट से पास कर राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है.

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राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद ही अध्यादेश लागू हो पाता है. खबर है की राष्ट्रपति सरकार से एक अध्यादेश को लेकर काफी नाराज है. दरअसल सरकार ने युद्ध के बाद पाकिस्तान और चीन चले गये लोगो की संपत्ति पर उत्तराधिकार या संपत्ति हस्तांतरण के दावों की रक्षा के लिए , शत्रु संपत्ति कानून में संसोधन किया था. करीब 50 साल पुराने इस कानून में हुए संसोधन को सरकार ने लोकसभा से पास करा लिया. लेकिन यह अभी भी राज्यसभा से पास नही हुआ है.

संसद में पास कराने से पहले सरकार ने जनवरी में एक अध्यादेश लाकर इसको लागू कर दिया. इसके बाद मार्च में इस संसोधन को लोकसभा में पास करा लिया गया. इससे पहले भी यह संसोधन अध्यादेश की शक्ल में राष्ट्रपति के पास जा चूका था. इसके बाद अगस्त में फिर इसी अध्यादेश को वापिस राष्ट्रपति के पास भेजा गया. लेकिन हैरान कर देने वाली बात यह है की इस अध्यादेश को बिना कैबिनेट की मंजूरी के ही राष्ट्रपति के पास भेज दिया गया. जबकि राष्ट्रपति जनवरी में कह चुके है की केवल असाधारण स्थिति में ही अध्यादेश लाया जाए.

जबकि प्रक्रिया यह की पहले अध्यादेश को कैबिनेट से पास कराना पड़ता है . इसके बाद अध्यादेश को राष्ट्रपति के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा जाता है. हालंकि अगस्त में राष्ट्रपति ने इस पर यह कहकर हस्ताक्षर कर दिए की चूँकि यह देश हित है और सुप्रीम कोर्ट में आये पेंडिंग मामलो को देखते हुए , मैं इस पर हस्ताक्षर कर रहा हूँ. अब एक बार फिर यही अध्यादेश राष्ट्रपति के पास गया है. यह पांचवी बार है जब एक ही अध्यादेश राष्ट्रपति के पास पहुंचा है. बुधवार को कैबिनेट ने एक बार फिर इस अध्यादेश को मंजूरी दे दी.

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