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संविधान और लोकतंत्र की मजबूती में मुस्लिम युवा निभाए भूमिका: मुफ़्ती खालिद मिस्बाही

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जयपुर, 21 अक्तूबर: भारतीय लोकतंत्र दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जहाँ पे युवाओ की सबसे बड़ी भागेदारी है, और दिलचस्प बात ये है कि इस युवाओ में मुस्लिम युवाओ की प्रतिशत सबसे अधिक है, इसलिए ज़रूरी है कि मुस्लिम युवाओं का भारतीय लोकतंत्र में विश्वास रहे, लोकतंत्र और संविधान में उनकी आस्था बरक़रार रहे। यह बात आज भारतीय सूफी मुस्लिमो की छात्रो की संस्था मुस्लिम स्टूडेंट्स आर्गेनाईजेशन ऑफ़ इंडिया (MSO) द्वारा आयोजित प्रोग्राम “भारतीय लोकतंत्र – चुनौतिया और अवसर” में जयपुर के उप-मुफ़्ती खालिद अय्यूब मिस्बाही ने कही.

उन्होंने कहा कि ISIS के उभार ने और वहाबी सलाफी विचारधारा ने युवाओ को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है, इन संगठनों और विचारो ने सबसे ज्यादा जिस चीज़ को निशाना बनाया है वो है “लोकतान्त्रिक प्रणाली”.  ISIS के वहाबी खिलाफ़त के निकट डेमोक्रेसी इस्लामी नज़रिए से वर्जित और हराम है लिहाज़ा जितने भी देश लोकतान्त्रिक तरीके से चल रहे हैं वो सब देशो में उनके हिसाब से जिहाद जायज़ है. भारत उनका सॉफ्ट टारगेट है. इसलिए भारतीय मुसलमानों को इस दिशा में बहुत जागरूक रहने की ज़रूरत है.

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MSO के जयपुर ज़िला अध्यक्ष वसीम खान ने कहा कि भारत में दक्षिणपंथी संगठनों द्वारा अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ एक प्लानिंग के तहत ऐसे कार्यो का करना जिससे समुदाय के अन्दर आत्मविश्वास की कमी हो रही है जो चिंता का विषय है, मोब लिंचिंग की बढती वारदात से भी मुस्लिमो को हताशा और निराशा हुयी है, इसलिए ज़रूरी है कि सरकार विश्वास बहाली और मुस्लिम छात्रो के लिए विशेष सुविधा का ध्यान देना होगा.

मौलाना गुलाम मोईनुद्दीन इमाम जामा मस्जिद अहंगरान ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र की व्यापकता, सुगमता, सरलता और बहुलता की प्रशंशा पुरे दुनिया में होती है क्युकी भारतीय लोकतंत्र में “मज़हबी आज़ादी, इस्लामिक देशो जैसे सऊदी अरब, क़तर, बहरीन , UAE आदि देशो से अधिक है.

गांधीवादी चिन्तक पंचशील जैन ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र में आप अपनी पसंद की सरकार चुन सकते है, जबकि बहुत से देश ऐसे है जिनमे अक्सर इस्लामी देश है वहाँ पर तानाशाही है, लोकतान्त्रिक मूल्यों का वहाँ कोई मतलब नहीं है.

सामाजिक कार्यकर्त्ता डॉ धीरज बेनीवाल ने कहा कि देश को प्रगति और विकास के लिए ज़रूरी है कि समाज में शांति और भाईचारा का माहौल स्थापित रहे, लेकिन अफ़सोस है कि कुछ संगठन धर्म के नाम पर समाज को बाटने का काम कर रहे है जो गलत है, हम सभी को ऐसे संगठनों और लोगो से दूर रहना होगा जो देश की सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ना चाहते है.

प्रोग्राम का सञ्चालन करते हुए MSO के मीडिया सचिव डॉ इमरान कुरैशी ने कहा कि मुसलमान ख़ासकर युवा चरित्र निर्माण पर बल दें, कट्टरवाद के प्रति सतर्क रहें, अपना करियर बनाएँ और समाज व देश की प्रगति में हिस्सा लें।

उन्होंने कहा कि देश में मुसलमान छात्रों के प्रतिनिधित्व के नाम पर कई कट्टरवादी संगठन चलते हैं जबकि एमएसओ सूफ़ीवाद पर आधारित संगठन है जो छात्रों के करियर और भविष्य बनाने के लिए तो प्रतिबद्ध है ही, साथ ही सामाजिक एकता, सामुदायिक भ्रातृत्व और देशप्रेम पर का संदेश देती है। इस मौक़े पर उन्होंने ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती रह. के सपनों के देश की कामना करते हुए देश में अमन की प्रार्थना की।

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