मुल्क की हिफाजत में कुर्बान हुए मोसिम खान, ईद के दिन दी गई आखिरी विदाई

जम्मू के नौशेरा में 16 ग्रेनेडियर में तैनात मोसिम खान (22) पाकिस्तानी फौज के स्नाइपर शूट में शुक्रवार को शहीद हो गए। मोसिम खान के पार्थिव शरीर को ईद उल अज़हा के दिन सुपुर्द ए खाक किया गया।

पत्रिका के अनुसार, झुंझुनूं के गांव कोलिंडा निवासी मोसिम खान का पार्थिव शरीर शनिवार को गाँव में पहुंचा। इस दौरान  शहीद मोसिम के पिता रिटायर्ड सूबेदार सरवर खान अपने जवान बेटे को तिरंगे में लिपटा देख अपनी सुध-बुध खो बैठे।

शहीद मोसिम खान की पार्थिव देह के साथ आए सेना के अधिकारी ने सरवर खान को तिरंगा सौंपते हुए शहादत को सलाम किया। जवानों ने गार्ड आफ ऑनर दिया।

जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कमांडर परवेज अहमद ने बताया कि बॉर्डर पर ड्यूटी के दौरान मोसिम खान किसी उपकरण से घायल होने के बाद शहीद हो गए। सेना के बोर्ड कार्यालय की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद मोसिम खान को शहीद का दर्जा दिया जाएगा।

शहीद के साथ तैनात उनके चचेरे भाई ग्रेनेडियर इकरार खान ने बताया कि चार भाई-बहनों में सबसे छोटे मोसिम 3 साल पहले ही सेना में भर्ती हुए थे। उनके बड़े भाई अमजद खान भी जम्मू के राजौरी इलाके में तैनात हैं। दो बहनों की पास के ही गांव कोल्याली और लावंडा में शादी हुई है। वहीं शहीद के पिता सरवर खान भी रिटायर्ड सूबेदार है।

ग्रेनेडियर इकरार खान ने बताया कि मोसिम खान के शहीद होने की सूचना उनको शुक्रवार शाम 5 बजे ही मिल गई थी। लेकिन उन्होंने परिवार में किसी को भी इसके बारे में नहीं बताया शनिवार सुबह शहीद के माता-पिता को इस दुखद घटना की जानकारी दी गई।

शहीद के चचेरे भाई नवाब अली ने बताया कि ईद उलजुहा पर्व की रौनक हर चेहरे से गायब हो गई। ईद के पहले दिन ही गांव को अपने लाडले की शहादत की जानकारी मिल चुकी थी। शनिवार को दिन भर गांव में मातम छाया रहा।


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