नागरिकता कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची केरल सरकार

नागरिकता कानून के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव पारित करने के बाद अब केरल सरकार ने इस कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

मुख्यमंत्री पिनरई विजयन के नेतृत्व वाली सरकार ने इस कानून को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 131 के सीएए को आर्टिकल 14, 21 और 25 का उल्लंघन घोषित करने की मांग की है। केरल सरकार ने अदालत से कहा है कि यह कानून संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 25 के साथ धर्मनिरपेक्षता के बुनियादी सिद्धांत का भी उल्लंघन करता है।

इससे पहले राज्य विधानसभा में एक प्रस्ताव भी पास किया था। यह प्रस्ताव सीएए को खत्म करने से संबंधित था। विधानसभा में सीएए के खिलाफ प्रस्ताव खुद मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने और विधानसभा में पेश किया था।

इस दौरान उन्होने कहा था कि  सीएए धर्मनिरपेक्ष नजरिए और देश के ताने बाने के खिलाफ है तथा इसमें नागरिकता देने में धर्म के आधार पर भेदभाव होगा। उन्होंने कहा, ‘यह कानून संविधान के आधारभूत मूल्यों और सिद्धांतों के विरोधाभासी है।’

विधानसभा में केरल के मुख्यमंत्री ने कहा, ‘केरल में धर्मनिरपेक्षता, यूनानियों, रोमन, अरबों का एक लंबा इतिहास रहा है। हर कोई हमारी भूमि पर पहुंचा है। ईसाई और मुस्लिम शुरुआत में केरल पहुंच गए थे। हमारी परंपरा समावेशिता की है। हमारी विधानसभा को इस परंपरा को जीवित रखने की आवश्यकता है।’ विजयन ने विधानसभा को यह भी आश्वासन दिया कि इस दक्षिणी राज्य में कोई हिरासत केंद्र (डिटेंशन सेंटर) नहीं खोला जाएगा।


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