दिल्ली हिं’सा मामले में इशरत जहां की याचिका हाईकोर्ट से खारिज

सीएए विरोधी प्रदर्शनों के दौरान भड़की मुस्लिम विरोधी हिं’सा मामले में गिरफ्तार कांग्रेस की पूर्व पार्षद इशरत जहां की याचिका शुक्रवार को सुनवाई के बाद दिल्ली हाई कोर्ट से खारिज हो गई। याचिका में जांच पूरी करने के लिए 60 दिन का और वक्त देने के आदेश को चुनौती दी गई थी।

न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत ने कहा कि निचली अदालत के आदेश में कुछ भी अवैध नहीं है। उच्च न्यायालय ने कहा, ‘मौजूदा याचिका में कोई दम नहीं है इसलिए इसे खारिज किया जाता है।’ दरअसल, दरअसल, दिल्ली पुलिस ने UAPA कानून के तहत आरोपी इशरत जहां की गिरफ्तारी के बाद उसे निचली अदालत में पेश किया था। यहां पुलिस ने कोर्ट से जांच के लिए 60 दिन का अतिरिक्त समय मांगा था।

दिल्ली पुलिस ने यह कहते हुए याचिका का विरोध किया कि जहां तक मामले में जांच की अवधि बढ़ाने के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के फैसले का संबंध है तो उच्च न्यायालय को मामले में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। इशरत जहां की ओर से वकील ललित वालेचा और मनु शर्मा ने पटियाला हाउस कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगाने की मांग की। उन्होंने कहा कि ट्रायल कोर्ट का फैसला गलत है। यह जनतांत्रिक और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। त्वरित और निष्पक्ष न्याय पाना न्याय प्रणाली का मौलिक गुण है।

याचिका में कहा गया है कि पटियाला हाउस कोर्ट के एडिशनल सेशंस जज धर्मेंद्र राणा ने पिछली 17 जून को स्पेशल सेल की अर्जी पर यह आदेश दिया था। याचिका में कहा गया है कि दिल्ली पुलिस ने कानून का दुरुपयोग किया है। चार्जशीट दाखिल करने के लिए समय बढ़ाने की मांग करना न्यायसंगत नहीं है। याचिका में इशरत जहां के खिलाफ अतिरिक्त धाराएं लगाने पर सवाल उठाया गया है, क्योंकि वह केवल शांतिपूर्ण प्रदर्शन की पक्षधर थी।

उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के 15 जून के आदेश को चुनौती देने वाली जहां की याचिका पर 20 जुलाई को फैसला सुरक्षित रख लिया था। जिस पर आज सुनवाई के बाद कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया है।


    देश के अच्छे तथा सभ्य परिवारों में रिश्ता देखें - Register FREE