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MSO की मांग – समलैंगिक संबंधों की मान्यता रद्द करने के लिए बनें कानून

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नई दिल्ली। सुप्रीमकोर्ट द्वारा समलैंगिकता को देश में मान्यता मिलने का मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया (MSO) ने कड़ा विरोध किया है।

मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया (MSO) के राष्ट्रीय अध्यक्ष इंजीनियर शुजात आली कादरी ने कहा है कि इस फैसले से लोगों का नैतिक पतन होगा और समाज में यौन अपराध बढ़ेगा, साथ ही हर रोज हिंसा की वारदात में भी इजाफा होगा। यह शर्मनाक कानून परिवार और समाज को पीछे ले जाएगा। आप पूरे समाज को मौलिक अधिकार का हवाला देकर यौन संबंधों के नाम पर अराजकता की ओर नहीं ढकेल सकते हैं।  उन्होंने कहा कि हर दैवीय किताब में समलैंगिक संबंधों को अप्राकृतिक करार दिया गया है।

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कादरी ने यह भी कहा है कि सुप्रीमकोर्ट ने फैसला सिर्फ मौलिक अधिकारों को ध्यान में रखकर दिया गया, जबकि इस बेहद गंभीर मुद्दे के सामाजिक, सांस्कृतिक और कुदरती पहलुओं को नज़रअंदाज़ किया गया है। शुजात कादरी ने इसे सीधे सीधे संस्कृति पर हमला और प्राकृतिक नियमों के साथ खिलवाड़ करार देते हुये कहा है कि इस फैसले से फेमली सिस्टम बर्बाद हो जाएगा। वहीं समाज में एड्स जैसी गंभीर बीमारी से बुरी बीमारी भी फ़ेल सकती है।

कादरी ने केंद्र सरकार से मांग की है कि इस वक़्त सरकार को कड़ा फैसला लेने की ज़रूरत है,और समाज को आगे बढ़ कर बचाने की ज़रूरत है, इस लिए सरकार इस मामले में आगे आए, और समलैंगिक संबंधों की मान्यता रद्द करने के लिए भी सरकार संसद में नया कानून बनाए।

कादरी ने कहा कि हमारा समाज शादी विवाह में विश्वास रखता है, हमारे समाज में बिना शादी के वासना तो स्त्री-पुरुष संबंधों में भी नहीं होनी चाहिए, इसीलिए समाज में विवाह का पवित्र बंधन रखा गया है। और अब इस तरह का फैसला देकर भारतीय संस्कृति का मज़ाक बना दिया गया है। ज़ाहिर है इससे संस्कृति का विनाश ही होगा।

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