एक तरफ दं’गाई ज’लाते रहे मस्जिद-दरगाह, दूसरी तरफ मुस्लिम करते रहे मंदिर की सुरक्षा

बीते तीन दिनों के दौरान देश की राजधानी में हैवानियत का नंगा नाच देखने को मिला। दं’गाइयों ने मुस्लिम धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचाने में कोई कसर नही छोड़ी। फिर भी मुसलमान इंसानियत का सबूत देते रहे। विडंबना ये है कि आज उन्हे ही का’तिल बताया जा रहा है।

बावजूद इसके दिल्ली के शिव विहार इलाके में एक मुस्लिम शख्स ने हिं’सक भीड़ से मंदिर की रक्षा की है। शख्स ने स्थानीय लोगों के साथ मिलकर ना सिर्फ मंदिर को बचाया बल्कि लोगों को समझाया भी। इस शख्स का नाम शकील अहमद है।

शकील ने न्यूज़ 18 इंडिया से बातचीत में बताया कि उपद्रवी तो’ड़फो’ड़ के इरादे से उनके क्षेत्र तिहारा में आए, तो वहां के कुछ लोग मस्जिद की तरफ बढ़ गये तो कुछ मंदिर की हिफाजत में लग गये। उन्होंने कहा, ‘उपद्रवी पहले मस्जिद की ओर बढ़ रहे थे लेकिन हमने ना ही उन्हें मस्जिद की ओर जाने दिया और ना ही शिव मंदिर की ओर।’

वहीं हाजी जहीर अहमद ने डीडब्ल्यू को बताया, “इस कॉलोनी वालों ने मंदिर को बचाना अपनी जिम्मेदारी समझा और इसलिए हम यहां कभी दो या कभी चार लोग आकर बैठते हैं ताकि शरारती तत्वों से इसे बचाया जा सके।” हाजी अहमद की तरह कई स्थानीय लोग बारी-बारी से यहां आकर मंदिर की सुरक्षा करते हैं। हाजी अहमद कहते हैं, “कॉलोनी वालों ने अंदर के घरों को भी बचाया है। नहीं तो बाहर के लोग आकर कॉलोनी में दूसरे समुदाय के लोगों के घरों को नुकसान पहुंचा देते।”

चमन पार्क के एक और निवासी मेहर आलम कहते हैं, “हमारे घर के बगल में ही हिंदुओं का मकान है और हम पिछले तीन दिनों से इस तरह से पहरा दे रहे हैं। हम मानते हैं कि हिंदू भी हमारे भाई हैं और यह भी एक धार्मिक स्थल है।” मंदिर के बाहर बैठे मोहम्मद नौशाद बताते हैं मंदिर की सुरक्षा का जिम्मा सभी लोगों ने उठाया है। वह कहते हैं, “हम लोग हिंदू और मुसलमान सभी को साथ जोड़कर रखना चाहते हैं. हमारी विचारधारा सबको साथ लेकर चलने की है।”

शिव विहार निवासी राम सेवक ने कहा, ‘मैं यहां पिछले 35 साल से रह रहा हूं। इस इलाके में सिर्फ एक या दो ही हिंदू परिवार रहते हैं, लेकिन हमे कभी किसी तरह की परेशानी नहीं हुई। हिंसा के समय मेरे मुस्लिम भाइयों ने मुझसे कहा कि अंकल जी, आप आराम से सो जाइए. आपको कोई नुकसान नहीं होगा।’


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