चीन LAC पर सेना हटाने के बजाय बढ़ा रहा, भारत ने बातचीत की स्थगित

भारत और चीन के बीच कॉर्प्स कमांडर लेवल के बीच की होने वाली बातचीत को टाल दिया गया है। दरअसल, चीनी सेना बातचीत के बावजूद लद्दाख के पैंगोंग त्सो और देपसांग इलाकों से पीछे नहीं हट रही है।इकले उलट अब चीन ने अरुणाचल प्रदेश में एलएसी के नजदीक भी सेना की तैनाती बढ़ा दी है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कॉर्प्स कमांडर लेवल की बातचीत अगले हफ्ते के लिए टाल दी गई है। पहले दोनों देशों के बीच कमांडर लेवल की बातचीत 30 जुलाई को प्रस्तावित थी। दरअसल, भारत की मांग है कि इचीन वापस अपनी उसी जगह पर जाए, जहां वो अप्रैल में था।

सूत्रों के मुताबिक चीन दावा कर रहा है कि सभी विवादित प्वाइंट्स पर डिसएंगेजमेंट की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है लेकिन भारत का कहना है कि गोगरा और पैंगॉन्ग में एक पखवाड़े से अधिक समय से स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। एक अधिकारी ने बताया, ‘पैंगॉन्ग और गोगरा एरिया में डिसएंगेजमेंट की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। चीनी सैनिकों की संख्या कुछ कम जरूर हुई है, लेकिन बहुत कुछ नहीं बदला है।’

इससे पहले खबर आई थी कि चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने अब दौलत बेग ओल्डी (डीबीओ) में 50 हजार सैनिकों की तैनाती कर दी है। ये इलाका अक्साई चिन के करीब है। अक्साई चिन जम्मू-कश्मीर का वह हिस्सा है, जिसमें जम्मू-कश्मीर का 15 फीसदी हिस्सा आता है।

अक्साई चिन को 1950 से ही चीन ने अपने कब्जे में कर रखा है और सन 1962 के युद्ध में कब्ज़ा जमा लिया था। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाते समय भी संसद में गृहमन्त्री अमित शाह ने इसे जम्मू-कश्मीर का हिस्सा कहा था।

अब चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के दौलत बेग ओल्डी (डीबीओ) में अक्साई चिन से महज 7 किमी. दूर करीब 50 हजार सैनिकों की तैनाती करने से एक बात साफ हो गई है कि चीन न केवल लद्दाख बल्कि अक्साई चिन के भी बड़े मिशन पर है। ऐसा लगता है कि चीन युद्ध की तैयारी कर रहा है।


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