बच्ची के बगीचे से फूल तोड़ लेने पर गांव के 40 दलित परिवारों का बहिष्कार

ऊंची जाति के लोगों के बगीचे से एक दलित बच्ची के फूल तोड़ लेने सज़ा गांव के 40 दलित परिवार भुगत रहे है।दरअसल फूल तोड़ लेने के बाद गांव के सभी दलित परिवारों का बहिष्कार कर दिया गया।

इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक लड़की के पिता निरंजन नायक ने बताया कि, ‘हमने बात को वहीं खत्म करने के लिए तुरंत ही माफ़ी मांग ली थी, लेकिन घटना के बाद कई बैठकें बुलाई गयीं और हमारा बहिष्कार करने का फैसला लिया गया। गांव में कोई भी हमसे बात नहीं करता है, ना ही हमें किसी सामाजिक कार्यक्रम में हिस्सा लेने दिया जाता है।’

गांव के ही एक निवासी ज्योति नायक ने बताया कि, ‘गांव में कोई भी दुकानदार हमें सामान नहीं देता है, जिसकी वजह से हमें 5 किलोमीटर दूर सामान लेने जाना पड़ता है, गांववाले हमसे बात भी नहीं करते हैं।’

इस गांव में करीब 800 परिवार रहते हैं। इनमें से 40 दलित परिवार भी हैं जो नायक बिरादरी के हैं। इस मामले में दलितों ने जिला प्रशासन और स्थानीय थाने को 17 अगस्त को ही ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में लिखा, “हमारे समुदाय के लोगों को गांव में काम मिलना भी बंद हो गया है। अधिकतर लोग अनपढ़ या कम पढ़े-लिखे हैं, ऐसे में उन्हें काम की तलाश में भटकना पड़ रहा है।”

ज्ञापन में यह भी लिखा है कि, “हमारे खिलाफ एक फरमान जारी कर दिया गया है कि हम गांव में कोई भी शादी या अंतिम संस्कार भी नहीं कर सकते। नजदीकी सरकारी स्कूल में बच्चों को पढ़ने नहीं दिया जा रहा है, और तो और हमारे समुदाय के टीचरों को भी अपना ट्रांसफर दूसरी जगह कराने को कहा गया है।”


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