चीन द्वारा भारतीय जवानों के बंधक बनाने की रिपोर्ट को सेना ने किया खारिज

कोरोना संकट के बीच लद्दाख में चीनी सेना द्वारा भारतीय सेना और इंडो-टिबेटन बॉर्डर पुलिस (आईटीबीपी) के एक गश्ती दल को हिरासत में लेने की रिपोर्ट्स को भारतीय सेना ने सिरे से खारिज कर दिया।

इंडियन आर्मी के स्पोक्सपर्सन अमन आनंद ने कहा कि लद्दाख में भारतीय जवानों को हिरासत में लिए जाने की कोई घटना नहीं हुई है। हम इसे पूरी तरह नकारते हैं। उन्होंने आगे कहा, “मीडिया संस्थान जब ऐसी बेबुनियाद खबरें सामने लाते हैं, तो इससे सिर्फ देशहित को नुकसान पहुंचता है।”

बता दें कि जनसत्ता की रिपोर्ट में कहा गया था कि इस मामले में सेना ने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को जानकारी दे दी है। साथ ही पांगोंग लेक के करीब हुए पूरे घटनाक्रम का भी ब्योरा दिया गया है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस बुधवार को ही स्थितियां काफी खराब हुईं, जब भारतीय जवान और चीनी जवान आपस में भिड़ गए। इस भिड़ंत के दौरान आईटीबीपी जवानों के हथियार भी छीन लिए गए थे। हालांकि, बाद में उन्हें सभी हथियार लौटा दिए गए और जवानों को भी छोड़ दिया गया।

केंद्र सरकार को भेजी गई जानकारी के मुताबिक, चीनी सेना भारत में काफी अंदर तक आने में सफल हो गई थी और फिलहाल पांगोंग लेक में मोटर बोट के जरिए आक्रामक तौर पर निगरानी कर रही है।

अधिकारी ने बताया कि यह घटना काफी बड़ी थी, लेकिन अब वहां शांति है। लेकिन यह अभी खत्म नहीं हुआ है। भारत और चीन दोनों ने ही अब बराबर संख्या में फौज की तैनाती कर दी है। चीन ने गलवन रिवर फ्रंट के साथ तीन अलग-अलग जगहों पर अपने टेंट लगा दिए हैं।


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