निज़ामुद्दीन मरकज: अब दिल्ली की कोर्ट से बरी हुए तबलीगी, नहीं मिला कोई सबूत

नई दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत ने निज़ामुद्दीन मरकज से जुड़े कथित कोरोना वायरस फैलाने से जुड़े मामले में सोमवार को आठ तबलीगी जमात के लोगों को बरी कर दिया। हालांकि इस दौरान 14 देशों के 36 नागरिकों के खिलाफ आरोप तय किए गए।

आरोपमुक्त किए गए आठ लोगों में से दो इंडोनेशिया से, एक किर्गिस्तान से, दो थाईलैंड से, एक नाइजीरिया से, एक कजाकिस्तान से और एक व्यक्ति जॉर्डन से है। अदालत ने इन छह देशों के नागरिकों को किसी रिकॉर्ड या उनके खिलाफ कोई विश्वसनीय सामग्री न होने के कारण सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। अदालत ने इन लेगों को आरोपमुक्त करते हुए कहा कि समूचे आरोपपत्र और अन्य दस्तावेजों को देखने के बाद पता चलता है कि ये लोग उस अवधि में मरकज के कार्यक्रम में मौजूद नहीं थे।

मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट गुरमोहिना कौर ने भारतीय दंड संहिता, आपदा प्रबंधन कानून और महामारी कानून की विभिन्न धाराओं के तहत 36 विदेशी नगारिकों के खिलाफ आरोप तय किए। अदालत ने आरोप तय करते हुए कहा कि गवाहों के बयानों, खासकर स्वास्थ्य अधिकारियों के बयान से पहली नजर में यह पता चलता है कि भौतिक दूरी के नियम का पालन नहीं किया गया।

बता दें कि हाल ही में बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) की औरंगाबाद बेंच ने देश और विदेश के जमातियों के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द कर दिया और कहा कि कार्यक्रम में भाग लेने वाले विदेशी नागरिकों को ‘‘बलि का बकरा” बनाया गया और उनपर आरोप लगाया गया कि देश में कोविड-19 को फैलाने के लिए वे जिम्मेदार थे।

कोर्ट ने शनिवार को मामले पर सुनवाई करते हुए कहा, ‘दिल्ली के मरकज में आए विदेशी लोगों के खिलाफ प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में बड़ा प्रॉपेगेंडा चलाया गया। ऐसा माहौल बनाने की कोशिश की गई, जिसमें भारत में फैले Covid-19 संक्रमण का जिम्मेदार इन विदेशी लोगों को ही बनाने की कोशिश की गई। तबलीगी जमात को बलि का बकरा बनाया गया।’

हाई कोर्ट बेंच ने कहा, ‘भारत में संक्रमण के ताजे आंकड़े दर्शाते हैं कि याचिकाकर्ताओं के खिलाफ ऐसे ऐक्शन नहीं लिए जाने चाहिए थे। विदेशियों के खिलाफ जो ऐक्शन लिया गया, उस पर पश्चाचाताप करने और क्षतिपूर्ति के लिए पॉजिटिव कदम उठाए जाने की जरूरत है।’


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