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Monday, November 29, 2021

तालि’बान और अमेरिका को लेकर ईरान के पूर्व राष्ट्रपति ने बड़ा खुलासा कर दुनिया को चौंकाया

ईरान के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने तालि’बान और अमेरिका को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है। जिसमे उन्होने दावा किया कि अमेरिका अफगानिस्तान में तालि’बान का समर्थन कर रहा है और विद्रो’ही समूह के साथ इस क्षेत्र में अपनी नई जमी तैयार कर रहा है।

उन्होने कहा, “यह निश्चित रूप से ऐसा ही है।” उन्होंने एक साक्षात्कार में WION के कार्यकारी संपादक पालकी शर्मा से कहा, जब उनसे पूछा गया कि क्या अमेरिकी तालि’बान का समर्थन कर रहे हैं। उन्होने कहा, “वास्तव में, तालि’बान अमे’रिकी साजिश का हिस्सा हैं।”

अहमदीनेजाद ने कहा, “मेरा मानना ​​​​है कि अमेरिकी, व्यवहार में, इस क्षेत्र से बाहर नहीं गए हैं। और वास्तव में, उनके पास नई जमीन हैं, जिन्हें डिजाइन किया जा रहा है और वे तालि’बान का समर्थन कर रहे हैं।” निकट भविष्य को लेकर उन्होंने कहा, अब तालि’बान ‘ग्रेटर खुरासान’ के नारे का सहारा लेगा और पूरे क्षेत्र में यु’द्ध और संघ’र्ष लाएगा। ग्रेटर खुरासान उस क्षेत्र को संदर्भित करता है जिसमें पूर्वोत्तर ईरान के वर्तमान क्षेत्र, अफगानिस्तान के कुछ हिस्सों और मध्य एशिया के दक्षिणी हिस्से शामिल हैं।

अहमदीनेजाद ने कहा, “अगर अमेरिका और तालि’बान को अन्य हथि’यार और रसद, वित्तीय और अन्य प्रोत्साहन प्रदान करके समर्थन नहीं करते हैं, तो तालि’बान अफगानिस्तान की सुरक्षा को ख’तरे में नहीं डाल पाएगा।” उन्होने कहा, “अगर अमेरिकी और अन्य लोग चले जाते हैं और बाहर रहते हैं, तो समस्याएं और अधिक तेज़ी से हल हो जाएंगी।”

तेहरान के पूर्व मेयर ने कहा कि जो कोई भी मदद करने को तैयार है, उसे यह सुनिश्चित करने के लिए ऐसा करना चाहिए कि अफगान राष्ट्र की इच्छा पूरी हो। “यह तब होगा जब अफगान राष्ट्र के वास्तविक प्रतिनिधि निर्णय लेंगे।” उन्होने कहा, “समूहों के बीच समझौते शांति नहीं लाते हैं। अफ़ग़ान राष्ट्र और उनके पड़ोसी देशों की सार्वजनिक इच्छा को लागू करने से शांति, शांति और सुरक्षा प्राप्त होती है।”

उन्होंने कहा कि बाहरी शक्तियों को अफगानिस्तान के मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए, लेकिन अफगान लोगों की इच्छा को लागू करने में मदद करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान के किसी भी पड़ोसी देश-ईरान, पाकिस्तान, भारत, चीन- या फारस की खाड़ी के देशों, नाटो और रूस- को देश के मामलों में दखल नहीं देना चाहिए।

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