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Friday, January 28, 2022

अनीस शीराज़ी: तब्लीगी जमात को ना तो हालात की फिक्र और ना ही कौम का दर्द

अनीस शीराज़ी

भारतीय मुसलमानों का एक तबका दोगलेपन में बहुत आगे है। उसे अपनी गैर जिम्मेदारी,नासमझी से कोई सरोकार नही बल्कि वो हर बात के लिए सरकारों को जिम्मेदार ठहराता है। उस तबके की नादानी की कीमत पूरी कौम उठाती है लेकिन ये तबका अपने कामो को मजहबी जज्बात का लबादा ओढ़ाकर कौम के सामने पेश करता है। जिसके विरोध की हिम्मत किसी मुसलमान में नही होती। हो भी तो कैसे कौम विरोधी होने का तमगा भला किसे अच्छा लगेगा।

उन्ही गैर जिम्मेदार लोगों में एक नाम तब्लीगी जमात का भी है। जो मुसलमानों में एक विशेष विचारधारा के प्रचार प्रसार के लिए दुनिया मे जानी जाती है। इस जमात का इंटरनेशनल ऑफिस। जिसे मरकज़ कहा जाता है। वो दिल्ली की बस्ती हज़रत निज़ामुद्दीन में स्थित है। इसी मरकज़ से पूरी दुनिया मे तब्लीगी जमात की गतिविधियों को संचालित किया जाता है। तब्लीगी जमात साल भर में सैंकड़ो धार्मिक जलसे जिन्हें इज्तिमा कहा जाता है। उनका आयोजन दुनिया भर में फैले अपने अनुयायियों के बीच करती है।

अब आइये बात करें इस जमात की गैर जिम्मेदारी की।

दिल्ली जो पिछले तीन महीनों से एनआरसी विरोधी आंदोलन का केंद्र बिंदु बनी थी। जहां कोने कोने में मुसलमान धरना प्रदर्शन कर रहे थे। उन आंदोलनों से इस जमात को कोई सरोकार नही था। दिल्ली के तनावपूर्ण माहौल के बीच 27 फरवरी को तब्लीगी जमात ने उस दिन वार्षिक इज्तिमा का आयोजन किया। जिस दिन दिल्ली के कुछ इलाकों में दंगा शुरू हुआ। इधर लोगो के घर जल रहे थे उधर जमात अपना इज्तिमा कर रही थी। यानि उसे लोगो की जान की कोई फिक्र नही थी बल्कि उसे तो अपनी विचारधारा को मजबूत करना था।

हजारो लोग इज्तिमे से लौटते दंगो में फंस गए लेकिन जमात के नीति नियंताओ पर कोई फर्क नही पड़ा। नाही उन्होंने हालात को देखते हुए कोई तदबीर की और नाही तरीका ही बदला। अभी दिल्ली दंगो की आग ठंडी भी नही हुई थी कि ये फिर शुरू हो गए। 10 मार्च से 15 मार्च तक एक इज्तिमा अपने मरकज़ में ही कर लिया। जिसमे दुनिया भर से तब्लीगी सदस्यों को बुला लिया। ना हालात की फिक्र ना कौम का दर्द। बस खुद के बनाए उसूल और तब्लीग की मारामारी। इसके बाद शुरू हुआ गैर जिम्मेदारी का सिलसिला। 20 मार्च को 22 होने वाले जनता कर्फ्यू की घोषणा होती है। फिर लॉक डाउन शुरू हो जाता है। पूरे भारत मे सभी मस्जिद, मदरसे और दरगाहें अक़ीदमंदो से खाली हो जाती है लेकिन मरकज़ गुलजार रहता है। कुछ लोग बीमार होते हैं लेकिन बात को छिपाया जाता है। जब हालात बेकाबू होते हैं और मरकज़ में मौजूद लोग बीमार होना शुरू होते हैं तो यही अल्लाह वाले मदद मांगने हॉस्पिटल चल पड़ते हैं। जिसके बाद गैर जिम्मेदारी की पोल खुलती है। लेकिन क्या कहा जाए कौम के उन होनहारों का जो अब सरकार को ही दोष देने में लगे हैं। भला सरकार ने उनके कोरोना के इंजेक्शन लगाए हैं। आपको आपकी हिफाज़त खुद करनी थी। आप तो खुद मौका दे रहे हो। अगर अब आपके मामले को कट्टरवादी भुनाएंगे तब आप विक्टिम कार्ड खेलने लगे हो।

भाई अगर लोग बीमार थे। विदेशी भी थे तब आप खुद आगे बढ़ कर उनका चेकअप कराते। आपने चेकअप नही कराया नही बल्कि सच्चाई से मुंह फेर लिया। जिससे आपके आठ लोगो की मौत हो गई। सच्चाई सामने है फिर दोष किसे। वो कुछ भी करें। आप तो वही करो जो सीधा और सच्चा रास्ता है। झूठ का जवाब झूठ से देने की इजाजत आपके मजहब में नही है। ऐसा कोई ना समझी का कोई काम करते ही क्यों हो जिसे नफरती चिंटू मुद्दा बनाये।

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