अबू अशरफ – ‘नया भारत और सुफियाए इस्लाम’

सूफी शब्द ‘सुफ’ से बनता है और अरबी भाषा में इसका मतलब सुफ्फा है यानी “ दिल की सफाई” ।कुछ लोग इसे फारसी शब्द ‘सूफ’ यानि कम्बल जैसा मोटा कपडा और ‘सफ़’ से जोड़कर बताते हैं यानी क़यामत के दिन पहली सफ़ (पंक्ति) में जो नेक जन्नती लोग होंगे, सूफी है । शेखुल इस्लाम ताहिरुल कादरी ने किताबे सुन्नत की रौशनी में यूँ बयां किया है कि “सुफियाए इस्लाम” ने जो सूफीवाद अपनाया वो आखिरी पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पवित्र जीवन का नैतिक पहलू है ।

इन्ही पहलुओं पर चलते हुए सभी सूफी संतो ने उस सुप्रीम पॉवर की सेवा करने का अर्थ, मानवता की सेवा करना बताया है । परन्तु आज के परिपेक्ष में कट्टरपंथी विचारधारा हर क्षेत्र पर हावी है जिसका परिणाम यह हुआ है कि हमारी धर्म निरपेक्षता और धार्मिक सहिष्नुत्ता कम होती जा रही है और दादरी तथा पालघर मौब लिंचिंग जैसी घटनाओं का हमे बार-बार सामना करना पड़ रहा है । इन हालातों में सूफीवाद हमारे लिए विकल्प के रूप में उभर के आया है, जो सभी धर्मो के बीच परस्पर सम्मान के सिद्धांत को बनाये रखने का सन्देश देता है ।

इसी समन्वय को बनाये रखने के लिए 2016 में दिल्ली में आयोजित विश्व सूफी फोरम के समापन समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सूफीवाद की जमकर प्रशंसा की और इस्लाम का बेशकीमती तोहफा करार दिया । प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि “ जब हम अल्लाह के 99 नामों के बारे में सोचते है तो उनमे से कोई भी बल और हिंसा का सन्देश नहीं देता है” उन्होंने अपने भाषण में यह भी कहा “और इस वक़्त जब हिंसा की काली परछाइयां ज्यादा लम्बी होती जा रही हैं, आप (सूफीवाद में विश्वास रखने वाले) नूर की रौशनी है; जब नौजवानों के ठहाकों को सड़कों पर बन्दूक के बल पर खामोश कर दिया जाता है, आप घावों पर मरहम लगाने वाली आवाज़ है” ।

यह तथ्य किसी से छिपा नहीं है कि मुसलमानों नें हमेशा से ही भारत में अन्य धर्मो के साथ अच्छे सम्बन्ध बनाये हैं और इस कड़ी को बढ़ते हुए सूफीवाद इस्लाम की खूबियों को तवज्जो, समाज को शांति और प्रेम के रास्ते पर लाने के लिए कार्यरत है । सूफीवाद इंसानों में सूर्य जैसा स्नेह, नदी जैसी उदारता और धरती जैसा आतिथ्य सत्कार ला कर सभी लोगों को बिना किसी भेदभाव के लाभ पहुचाने में विश्वास रखता हैं । इन्ही मानवीय भावों के कारण, इसने समाज में महिलाओं को उचा रुतबा और स्थान दिया है । खुदा हम सभी को सूफियों के नक़्शे कदम पर चलाकर एक नेक समाज के निर्माण की तौफीक अता करे ।

अबू अशरफ, सदर, MSO उत्तर प्रदेश 


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