विचार

रामनवमी हिंसा: बेटे के कातिलों को माफ कर दीजिएगा इमाम साहब मगर…

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माफ़ कर देना अच्छी बात है मगर सवाल माफ़ करने का नहीं है, सवाल ये है कि वो कौन लोग थे जिन्होंने इमाम साहब के लड़के को जान से मार डाला? अगर आज उनकी पकड़ नहीं हुई तो कल किसी...

ध्रुव गुप्त: ‘हजरत अली शांति और अमन के दूत’

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ध्रुव गुप्त हज़रत अली इब्ने अबू तालिब उर्फ़ हज़रत अली का शुमार विश्व इतिहास की कुछ महानतम शख्सियतों में किया जाता है। इस्लाम के लगभग डेढ़ हज़ार साल के इतिहास में वे ऐसे शख्स हैं जो अपनी सादगी, करुणा, प्रेम,...

क्यों कंबल लपेट कर चुप चाप चले गए अन्ना हज़ारे इस बार

हम लोग अक्सर आरएसएस की औकात को ज्यादा कर के आंकते हैं. कुछ कहानियां गढ़ी जाती हैं इसके बारे में और हम विश्वास कर लेते हैं. हकीकत ये है कि ये बुझदिल लोग हैं और मुक़ाबला किया जाये तो...

रवीश कुमार: ‘इन दो पिताओं को सुन लें, इससे पहले कि नेता आपको दंगाई...

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“मैं शांति चाहता हूं। मेरा बेटा चला गया है। मैं नहीं चाहता कि कोई दूसरा परिवार अपना बेटा खोए। मैं नहीं चाहता कि अब और किसी का घर का जले। मैंने लोगों से कहा है कि अगर मेरे बेटे...

‘सतत विकास लक्ष्य के आईने में सस्ती और टिकाऊ ऊर्जा तक पहुंच का सवाल’

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वर्ष 2000 में संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा सहस्राब्दि विकास के 8 लक्ष्य तय किये थे. जिसका मकसद  2015 तक दुनिया भर में गरीबी, स्वास्थ्य, मृत्यु दर, शिक्षा, लिंगभेद, भुखमरी जैसी चुनौतियों पर काबू पाना था. लेकिन दुर्भाग्य से 2015...

जावेद अनीस: ‘हबीबगंज जंक्शन प्राइवेट लिमिटेड’

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सरकार हमारे रेलवे स्टेशनों को एअरपोर्ट के तर्ज पर विकसित करना चाहती है. हाल ही में वित्त मंत्रालय ने रेलवे स्टेशनों को इंफ्रास्ट्रक्चर का दर्जा देने की स्वीकृति दी है जिसके तहत रेलवे स्टेशनों का व्यावसायिक व रिहायशी उपयोग...

उत्तराखंड में आर्थिक ग़ुलामी की दस्तक, मेडिकल की फीस में 400 प्रतिशत की वृद्धि

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उत्तराखंड के प्राइवेट मेडिकल कालेज ने 400 प्रतिशत फीस बढ़ा दी है। यहां के तीन प्राइवेट मेडिकल कालेज में करीब 650 छात्र छात्राएं पढ़ती हैं। आधे उत्तराखंड के ही हैं। राज्य सरकार ने मेडिकल कालेज को फीस बढ़ाने की...

रवीश कुमार: ‘पब्लिक मेरा संपादक और मैं पब्लिक न्यूज़ रूम में काम करता हूं’

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हमारा चैनल अब कई शहरों में नहीं आता है। इससे काम करने के उत्साह पर भी असर पड़ता है। शहर का शहर नहीं देख पा रहा है, सुनकर उदासी तो होती है। इससे ज्यादा उदासी होती है कि संसाधन...

जामिया महज़ एक यूनिवर्सिटी नहीं बल्कि ब्रिटिशों के ख़िलाफ़ संघर्षों की मुकम्मल तारीख़

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डॉक्टर जाकिर हुसैन ने 1938 में जामिया के स्थापना के उद्देश्यों के बारे में कहा था कि “जामिया का मुख्य उद्देश्य भारतीय मुसलमानों के भविष्य के जीवन के लिए इस तरह के एक रोडमैप को विकसित करना है जो...

रवीश कुमार: तुम न नागरिक रहे, न इंसान, न बैंकर, बग़ैर कीमत के ग़ुलामी...

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“अब डेपोजीट की बात करते हैं । सरकारी पैसे या तो SBI में रखे जाते हैं या तो प्राइवेट बैंको में। बाकी राष्ट्रीयकृत बैंकों को कुत्तों की तरह झपट्टा मारना पड़ता है।ज़्यादातर निधि जो प्रशासन को मिलती है वो...

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