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एर्दोगान की जीत पर भारतीय संघियों में बेचैनी क्यों ?

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तारिक अनवर चंपारणी  एर्दोगान की जीत पर पश्चिमी देशों सहित भारतीय संघियों में भी बेचैनी है। "द वायर" नामक कांग्रेसी पोर्टल पर एक नौसीखिया पत्रकार है जो स्वयं को अम्बेडकरवादी एवं दलितवादी बोलता है। वह एर्दोगान की तुलना मोदी से...

मुगलों की देन है कुर्ता-पाजामा, भाजपाई छोड़ दे पहनना

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डॉ. शारिक़ अहमद ख़ान पहले अपना पैजामा उतारो और कुर्ता खूंटी पर टांगो,बाबा रामदेव की तरह कपड़े पहनो--यूपी सरकार का कहना है कि मदरसों में कुर्ता-पाजामा की जगह पैंट शर्ट चलेगी। वजह कि कुर्ता-पाजामा से मदरसे के छात्रों की पहचान...

इमरान खान का पाक का पीएम बनना भारत के हित में नहीं

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डॉ. शारिक़ अहमद ख़ान अकबर से लड़े योद्धा और सूफ़ी पीर रोशन के वंशज इमरान ख़ान के पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बनने पर कबायली पश्तून कबीलों के हाथ पाकिस्तान चला जाएगा। पाकिस्तानी सेना में पश्तून हावी हैं लिहाज़ा ये एक प्रकार...

बिहार के पहले मुस्लिम सीएम अब्दुल गफ़ूर, जो कर दिए गए गुमनाम

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मुहम्मद उमर अशरफ़ आज़ादी के बाद से बिहार में कई मुख्यमंत्री बने। लेकिन आपको जानकर हैरत होगी कि आजादी के बाद से अब तक बिहार में सिर्फ एक ही मुस्लिम सीएम बने हैं। जिन्हे हम लोग अब्दुल गफ़ुर के नाम...

अजित अंजुम: बलात्कारी हो हिन्दू तो खून नहीं खौलता, पीड़िता मुसलमान हो तो सन्नाटा...

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मैं एक हफ्ते से बाहर था। सोशल मीडिया और मीडिया से भी लगभग दूर। आज ही लौटा। आज ही जाना कि मंदसौर में क्या हुआ। मैंने जैसे ही मनीषा पांडेय की एक पोस्ट शेयर की,  हिंदुत्ववादी भाई लोग आ...

आखिर भीड़ का शिकार आलोचक, अल्पसंख्यक और दलित ही क्यों ?

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सत्येन्द्र सार्थक मध्यकालीन इतिहास में दी जाने वाली बर्बर सजाएं मनुष्यता के अशिक्षित और सांस्कृतिक तौर पर पिछड़े होने की परिचायक मानी जाती हैं। लेकिन 21वीं सदी में जबकि हमने शिक्षा-संस्कृति, ज्ञान-विज्ञान, कला-साहित्य के क्षेत्र में असाधारण उपलब्धियां हासिल कर...

अल्लामा इकबाल ने दिया था आला हजरत को वक़्त ए इमाम अबु हनीफा का...

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अनीस शेराजी आला हज़रत,बड़े हज़रत,बड़े मौलाना साहिब,इमाम अहमद रज़ा के नामो से पहचाने जाने वाली शक्सियत मौलाना अहमद रज़ा खान 'फाजिले बरेलवी' है। 10 शब्बाल 1272 हिजरी यानि 14 जून 1856 को उत्तर भारत के रुहेलखंड इलाके के बरेली शहर में...

हल्दीघाटी में गूँजा था राणा प्रताप का शौर्य, क्योंकि उनके सेनापति थे हकीम ख़ाँ...

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डॉ.पंकज श्रीवास्तव इतिहास आज़ादी के लिए लड़ने वालों को हमेशा सलामी देता है। राणा प्रताप की वीरगाथा भी इसी श्रेणी में आती है। उन्होंने अपने ‘राज्य’ मेवाड़ को बचाने के लिए उस समय की ‘केंद्रीय सत्ता’ यानी फतेहुपर सीकरी के...

परिवारों को टूटने से बचाती हैं शरिया अदालत, फिर हंगामा क्यों ?

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उबैद उल्लाह नासिर भारतीय मुसलमानों की प्रतिनिधि संस्था आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड द्वारा प्रत्येक जिले में “दारुल कुजा” या शरई अदालतों के गठन के एलान के साथ भारत की मीडिया विशेषकर चैनलों ने ऐसा दिखाने और समझाने का...

‘कश्मीरियों का जितना खून बहेगा, भाजपा का वोट बैंक उतना ही मजबूत होगा’

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कश्मीरियों का जितना खून बहेगा हिंदी पट्टी में भाजपा का वोट बैंक उतना ही मजबूत होगा... मोदी सरकार ने शान्त हो रही घाटी को नब्बे के दशक में धकेल दिया... एक ऐसे समय में जब खून के दरिया में गोते...

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